भोपाल मेट्रो का सूर्यनगर स्टेशन पाँच वर्ष पहले एक दुर्घटना के बाद हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था।
उसके बाद से…
वहाँ कोई ट्रेन नहीं चलती थी।
फिर भी…
हर रात 12:47 बजे…
कंट्रोल रूम के मॉनिटर पर…
एक ट्रेन कुछ मिनटों के लिए दिखाई देती।
जब पुलिस वहाँ पहुँचती…
तो स्टेशन पूरी तरह खाली मिलता।
कोई ट्रेन नहीं…
कोई यात्री नहीं…
सिर्फ़ ज़मीन पर कुछ गीले पैरों के निशान…
जो अचानक गायब हो जाते।
साइबर और क्राइम ब्रांच अधिकारी एसीपी निहारिका राणा को इस मामले की जांच सौंपी जाती है।
जांच शुरू होते ही…
उन्हें एहसास होता है…
कि यह सिर्फ़ एक रहस्य नहीं…
बल्कि वर्षों से चल रहा ऐसा अपराध है…
जिसके गवाह ज़िंदा हैं…
लेकिन बोलने से डरते हैं।
