दादी की आख़िरी रेसिपी

दादी की आख़िरी रेसिपी
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इंदौर के पास बड़गाँव नाम का एक कस्बा, जहाँ “लक्ष्मी निवास” हवेली अपने मशहूर पारंपरिक व्यंजनों के लिए जानी जाती थी। उस हवेली की मालकिन सरस्वती देवी, जिन्हें पूरा इलाका “दादी” कहकर बुलाता था, अपनी मृत्यु से पहले एक आख़िरी रेसिपी लिखकर कहीं छिपा गई थीं।

कहते थे, वह रेसिपी सिर्फ़ एक मिठाई की नहीं, बल्कि करोड़ों की विरासत और एक पुराने हत्या के राज़ की चाबी थी। जब हवेली का एक सदस्य रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाया जाता है, तो जांच की जिम्मेदारी मिलती है एसीपी अथर्व राणे को। उनके साथ खाद्य इतिहास विशेषज्ञ अन्वी कुलश्रेष्ठ और फॉरेंसिक अधिकारी डॉ. युविका सूद इस रहस्य की तह तक पहुँचते हैं। लेकिन जैसे-जैसे वे दादी की रेसिपी के करीब पहुँचते हैं, वैसे-वैसे उन्हें एहसास होता है कि रेसिपी स्वाद की नहीं, बल्कि एक अपराध की भाषा थी।

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