कुछ दोस्तियाँ धीरे-धीरे, बिना शोर के पनपती हैं। एक साधारण छत के नीचे, जब बारिश थमने का नाम नहीं लेती, दो अजनबी एक-दूसरे की ओर देखते हैं। न कोई वादा, न कोई बड़ी बात—बस एक मुस्कान और दो नाम। मीरा और लियो की कहानी भी यहीं से शुरू होती है—नदीपुर के उस छोटे से कस्बे में, जहाँ नदी कभी शांत नहीं रहती, और बारिश हर बार कुछ नया सिखाती है। यह कहानी दोस्ती की है—जो टूटती भी है, बहती भी है, और अंत में फिर से किनारे से किनारे तक पहुँच जाती है। जैसे वह बारिश, जो कभी पूरी तरह थमती ही नहीं।
