लाल नक़ाब

लाल नक़ाब
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काल्पनिक महानगर रुद्रावली अपनी पुरानी हवेलियों और आधुनिक elite society के अजीब मेल के लिए जाना जाता है। शहर के पुराने हिस्से में एक बंद हवेली है— रक्तमहल। हर वर्ष केवल एक रात उसकी रोशनी जलती है। उस रात वहाँ आयोजित होता है— The Red Masquerade इसके बारे में शहर में एक urban legend प्रसिद्ध है— “यहाँ नक़ाब चेहरा नहीं छिपाता। वह असली इंसान बाहर लाता है।” वेदिका सहगल एक सफल 33 वर्षीय luxury portrait photographer है। उसकी जिंदगी बाहर से perfect दिखाई देती है। सफल career। प्रतिष्ठित परिवार। पति अर्णव। महँगा घर। सामाजिक पहचान। लेकिन वेदिका के भीतर वर्षों से कई इच्छाएँ दबी हुई हैं। उनमें सबसे बड़ी इच्छा किसी दूसरे व्यक्ति के लिए नहीं— अपनी जिंदगी को दोबारा स्वयं चुनने की इच्छा। Red Masquerade के बाद… उसकी दुनिया बदल जाती है। उसके फोन का facial recognition उसे नहीं पहचानता। पुरानी photographs में उसका चेहरा बदल चुका है। उसके social accounts पर किसी दूसरी महिला की तस्वीरें हैं। उसके परिवार के लोग दावा करते हैं— उन्होंने वेदिका को पहले कभी नहीं देखा। लेकिन उसके पास अपनी जिंदगी की हर memory मौजूद है। उसका पहला शक है— नक़ाब ने उसका चेहरा बदल दिया। लेकिन forensic psychologist डॉ. कियारा अवस्थी उससे एक सवाल पूछती हैं— “अगर आपका चेहरा बदल गया है… तो आईना आपको अभी भी पुराना चेहरा क्यों दिखा रहा है?” यहीं से असली mystery शुरू होती है।

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