इंदौर के प्रतिष्ठित कारोबारी वर्धमान कोठारी के बेटे अर्णव कोठारी की शादी नायरा राजदान से होने वाली थी। शादी के लिए शहर से दूर स्थित शानदार राजविलास पैलेस को तीन दिनों के लिए बुक किया गया था। पहले दिन मेहंदी, दूसरे दिन हल्दी और संगीत, तीसरे दिन शादी। दोनों परिवार वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे, लेकिन इस रिश्ते के पीछे सिर्फ़ प्यार नहीं था। करोड़ों की संपत्ति, एक पुराना व्यापारिक समझौता, दो परिवारों के बीच वर्षों से दबा विवाद और अठारह साल पहले हुई एक रहस्यमयी मौत भी जुड़ी थी।
शादी शुरू होने से एक दिन पहले अर्णव को एक गुमनाम संदेश मिलता है— “फेरे लेने से पहले सच बता देना… वरना सातवाँ फेरा कभी पूरा नहीं होगा।” अर्णव इसे मज़ाक समझकर छिपा देता है। लेकिन संगीत की रात उसे दूसरा संदेश मिलता है— “तुम्हारी शादी में वही व्यक्ति मौजूद है… जिसने अठारह साल पहले पहली हत्या की थी।” अर्णव किसी को कुछ बताने से पहले ही शादी वाली रात मृत मिलता है।
पुलिस पैलेस सील कर देती है। किसी मेहमान को बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलती। मामले की जांच एसीपी वेदिका राठौर को सौंपी जाती है। उनके साथ फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. अर्णिमा सेन और व्यवहार विश्लेषक समर्थ व्यास जांच शुरू करते हैं। लेकिन पहली ही पूछताछ में उन्हें एहसास होता है— शादी में मौजूद लगभग हर करीबी व्यक्ति अर्णव से कुछ छिपा रहा था। और किसी एक का झूठ हत्या से भी बड़ा था।
All Chapters
- अध्याय 1 — शादी का पहला दिन
- अध्याय 2 — मेहंदी में छिपा नाम
- अध्याय 3 — संगीत की रिकॉर्डिंग
- अध्याय 4 — अठारह साल पुरानी शादी
- अध्याय 5 — सातवाँ फेरा
- अध्याय 6 — सात मिनट का अंधेरा
- अध्याय 7 — दुल्हन के कमरे में लाश
- अध्याय 8 — बारह संदिग्ध
- अध्याय 9 — तस्वीर से गायब चेहरा
- अध्याय 10 — शादी का दूसरा प्लान
- अध्याय 11 — मंडप में कातिल
- अध्याय 12 — अधूरा सातवाँ फेरा
