आठ साल पुराने रिया मल्होत्रा murder case में सभी सबूत उसके boyfriend विवेक खन्ना के खिलाफ थे, और उसने खुद हत्या कबूल भी कर ली थी। लेकिन जेल में उसकी मौत के बाद मिली एक line—“मैंने उसे नहीं मारा, मैंने सिर्फ वही माना जो मुझे याद कराया गया”—investigative journalist अद्वैत राणा को case दोबारा देखने पर मजबूर करती है। पुराने forensic records, contradictory memories और missing interrogation footage की जाँच करते हुए अद्वैत को पता चलता है कि confession शायद सच नहीं था। लेकिन जैसे-जैसे वह असली killer के करीब पहुँचता है, उसे महसूस होता है कि यह case केवल रिया की मौत से नहीं, बल्कि उसकी अपनी जिंदगी की एक ऐसी रात से भी जुड़ा है जिसे वह वर्षों से गलत तरीके से याद करता आया है।
All Chapters
- अध्याय 1 – उसने कबूल क्यों किया?
- अध्याय 2 – मौत का गलत समय
- अध्याय 3 – जो उसे याद था
- अध्याय 4 – पच्चीस मिनट गायब
- अध्याय 5 – रिया क्या खोज रही थी?
- अध्याय 6 – खून सच बोलता है?
- अध्याय 7 – पाँचवाँ confession
- अध्याय 8 – मुझे ऐसा याद क्यों है?
- अध्याय 9 – सच के बहुत करीब
- अध्याय 10 – रिया की आखिरी रात
- अध्याय 11 – जो सच उसे याद कराया गया
- अध्याय 12 – याद और सच
