सात कदम

सात कदम
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अपनी दादी की मृत्यु के बाद 32 वर्षीय wedding filmmaker विहान राजपूत अपनी मंगेतर अनाया के साथ पुश्तैनी हवेली लौटता है, जहाँ उनकी शादी होने वाली है। लेकिन हवेली में एक पुराना नियम है—रात 12:07 के बाद कोई उस बंद मंडप के पास नहीं जाता जहाँ सत्ताईस वर्ष पहले एक शादी अचानक रोक दी गई थी। पहली ही रात विहान को मंडप से पायल की आवाज़ सुनाई देती है। वह सात कदमों की गिनती करता है—एक, दो, तीन, चार, पाँच, छह… फिर खामोशी। अगली सुबह मंडप की धूल में छह पैरों के निशान होते हैं और सातवें स्थान पर खून से लिखा मिलता है—“इस बार मुझे अकेला मत छोड़ना।”

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