रोहन कुमार।
दिल्ली की गलियों से निकला हुआ एक नाम, जो बेंगलुरु की चमचमाती आईटी दुनिया में उतरा था — एक साधारण सा बैग, लैपटॉप, और उन आँखों में एक ऐसी चमक जो कभी नहीं मद्धिम पड़ती।
24 साल की उम्र में उसकी आवाज़ में पहले से ही वो गहराई थी — थकी हुई लेकिन मजबूत, जैसे कोई जो दिन-रात स्क्रीन के सामने बैठकर भी अंदर से कभी नहीं थकता।
उसके हाथ — लंबी, तेज उँगलियाँ, जो कीबोर्ड पर इतनी आसानी से नाचती हैं कि बग्स को पकड़ने में सेकंड्स लगते हैं। लेकिन जब वो हाथ कॉफी के कप को थामते हैं, या किसी की कमर पर हल्के से टिकते हैं, तो समय थम जाता है।
उसकी शर्ट — ओवरटाइम की वजह से थोड़ी सिलवटों वाली, कॉलर खुला हुआ, गर्दन पर पसीने की हल्की चमक… वो महक जो कॉफी और मेहनत का मिश्रण है, और जो पास आने वाली किसी भी औरत को एक पल के लिए रुकने पर मजबूर कर देती है।
आईटी की दुनिया ने उसे बहुत कुछ सिखाया — 9 से 6 का झूठ, डेडलाइन की सच्चाई, ऑफिस की मीटिंग्स जो रात में भी जारी रहती हैं। लेकिन रोहन की असली कहानी उन पलों में छुपी है जो मीटिंग के बाद शुरू होते हैं।
जब लाइट्स डिम हो जाती हैं।
जब PG का छोटा कमरा अचानक बहुत छोटा लगने लगता है।
जब नेहा की नजरें उसकी आँखों से मिलती हैं और वो हल्की-सी मुस्कान देता है — वो मुस्कान जो कहती है, “अभी तो सिर्फ शुरुआत है।”
यह कहानी रोहन की है।
कोड लिखने वाले रोहन की।
कॉफी पीते हुए थकान छुपाने वाले रोहन की।
और उन अनकहे राज़ों की, जो वो कभी ज़ोर से नहीं कहता — लेकिन हर बार नेहा के करीब आने पर उसकी साँसों में, उसकी उँगलियों में, उसकी नज़र में महसूस हो जाते हैं।
परिवार का दबाव आएगा।
ऑफिस की साजिशें आएँगी।
विक्रम का ईगो, प्रमोशन का खेल, लेऑफ की अफवाहें — सब कुछ आएगा।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल वही रहेगा जो हर पन्ने पर गूँजेगा:
रोहन के secrets क्या हैं?
और जब वो खुलेंगे, तो क्या नेहा उन्हें संभाल पाएगी… या वो खुद उनमें खो जाएगी?
क्योंकि रोहन सिर्फ एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं है।
वो वो आदमी है जिसके बारे में औरतें रात को सोचती हैं — थोड़ा दूर, थोड़ा पास, लेकिन हमेशा… unforgettable.
रात अभी बाकी है।
और रोहन की कहानी अभी शुरू हुई है।
All Chapters
- अध्याय 1: सपनों का शहर – बेंगलुरु की शुरुआत
- अध्याय 2: कोडिंग की दुनिया में पहला झटका
- अध्याय 3: ऑफिस की राजनीति और दोस्ती
- अध्याय 4: पहला बड़ा प्रोजेक्ट और थकान
- अध्याय 5: प्रमोशन का सपना और झटका
- अध्याय 6: क्राइसिस और सच का सामना
- अध्याय 7: इस्तीफा और नई शुरुआत
- अध्याय 8: परिवार और बैलेंस
- अध्याय 9: चुनौतियां जारी
- अध्याय 10: अंतिम सबक
