एक दुल्हन अपने विवाह मंडप में बैठी है।
संगीत बज रहा है।
मेहमान मुस्कुरा रहे हैं।
परिवार खुश दिख रहा है।
पर दूल्हे की आँखों में एक ऐसा सन्नाटा है जिसे कोई पढ़ नहीं पा रहा।
शहर में पिछले कुछ महीनों से रहस्यमयी हत्याएँ हो रही हैं, और हर हत्या के पीछे एक ही निशान मिलता है—लाल चूड़ी का टूटा हुआ टुकड़ा।
जब दुल्हन को शादी की रात पता चलता है कि उसका पति उन्हीं हत्याओं से जुड़ा हो सकता है, तो उसकी पूरी दुनिया हिल जाती है।
क्या वह सचमुच एक कातिल से शादी कर चुकी है?
या उसके पति को किसी बड़ी साजिश में फँसाया जा रहा है?
प्यार, डर, शक और सच के बीच फँसी एक दुल्हन को तय करना है—
वह अपने पति पर भरोसा करे…
या खुद को बचाए?
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- अध्याय 1: विवाह मंडप का सन्नाटा
- अध्याय 2: लाल चूड़ी का पहला संकेत
- अध्याय 3: शादी की रात का रहस्य
- अध्याय 4: छिपे हुए अतीत की परछाइयाँ
- अध्याय 5: परिवार की दीवारें और बढ़ता शक
- अध्याय 6: प्यार और डर का नाजुक संतुलन
- अध्याय 7: नया हत्यारा और पुराना निशान
- अध्याय 8: सच्चाई की टूटती परतें
- अध्याय 9: अंतिम सामना और भावनात्मक संघर्ष
- अध्याय 10: कातिल की दुल्हन – अंतिम फैसला
