माँ की मृत्यु के बाद तैंतीस वर्षीय डॉक्यूमेंट्री एडिटर नील अवस्थी भोपाल के बाहर अपने पुश्तैनी घर लौटता है—उसी घर में जहाँ 17 जुलाई 2001 की तूफ़ानी रात उसके पिता की मृत्यु हुई थी और उसकी बड़ी बहन रिया गायब हो गई थी। नील को उस रात की लगभग कोई स्पष्ट याद नहीं। घर लौटने की तीसरी रात वह 18 सितंबर 2026 को सोता है, लेकिन आधी रात के बाद उसका फ़ोन, घड़ी और बिना प्लग वाला पुराना टेलीविज़न अचानक 17 जुलाई 2001 दिखाते हैं। बाहर वही सत्ताईस साल पुरानी बारिश हो रही है, किचन में मृत माँ खड़ी हैं और ऊपर से दस वर्षीय रिया पुकारती है—“नील, इस बार सो मत जाना। रात फिर अधूरी रह जाएगी।” यह रात पूरी तरह रिपीट नहीं होती। हर वापसी में वह थोड़ी और आगे खुलती है। क्योंकि नील भविष्य बदलने नहीं जा रहा—रात स्वयं उसके पास लौट रही है, क्योंकि उसकी कहानी कभी पूरी नहीं हुई।
All Chapters
- अध्याय 1 – रात फिर लौट आई
- अध्याय 2 – आज 17 जुलाई 2001 है
- अध्याय 3 – रिया ऊपर मेरा इंतज़ार कर रही है
- अध्याय 4 – माँ ने कहा था ऊपर मत जाना
- अध्याय 5 – उस रात पापा नहीं मरे थे
- अध्याय 6 – हर बार रात थोड़ी आगे बढ़ती है
- अध्याय 7 – रिया घर से भागी नहीं थी
- अध्याय 8 – मैंने उस रात खुद को सोते देखा
- अध्याय 9 – कुएँ के नीचे क्या था?
- अध्याय 10 – सुबह सिर्फ मैं क्यों मिला?
- अध्याय 11 – उस रात वास्तव में कौन लौटकर आया था?
- अध्याय 12 – लौटती रात
