जब मैंने पहली बार उस लाल जोड़े को पहना, तो शीशे में अपनी ओर देखते हुए मेरे हाथ काँप रहे थे। आज मैं दुल्हन बनने जा रही थी, पर मेरे अंदर की लड़की अभी भी अधूरी सपनों को समेटे हुए थी। नाम है मेरी—अन्विता। गाँव की साधारण सी लड़की, जिसने हमेशा किताबों में पढ़े प्रेम को हकीकत में ढूंढने का सपना देखा था।
मेरी माँ कहती थीं, “विवाह के बाद सब ठीक हो जाता है।” पर क्या सचमुच हो जाता है? आज जब मैं मंडप के पास खड़ी हूँ, तो मेरे मन में खुशी के साथ-साथ एक अजीब सा डर भी है। अर्जुन—जिसके साथ मेरी शादी हो रही है—देखने में अच्छा, पढ़ा-लिखा और परिवार का इकलौता बेटा। पर उसकी आँखों में कुछ ऐसा है जो मुझे समझ नहीं आ रहा। क्या वह मुझे सचमुच चाहता है, या यह सिर्फ़ परिवार की मजबूरी है?
मैंने हमेशा एक ऐसे घर की कल्पना की थी जहाँ हँसी हो, विश्वास हो, और प्रेम धीरे-धीरे खिले। पर आजकल रिश्तों में सब कुछ इतना जल्दी होता है कि समय मिलता ही नहीं समझने का। मेरे दिल में अनकहे राज़ हैं—वो पुरानी डायरी, वो खत जो मैंने कभी किसी को नहीं दिखाया, और वो सपना जो शायद अब टूटने वाला हो।
क्या यह विवाह मेरी जिंदगी को नई शुरुआत देगा, या बस एक और सुनसान सफर? जब मैं आज रात उसकी बाहों में जाऊँगी, तो क्या मैं अपनी असली पहचान खो दूँगी? या फिर कुछ ऐसा होगा जो मेरी सारी उम्मीदों को चूर कर दे?
