रात के ठीक 12:07 बजे एक लड़की अपने भाई को आखिरी कॉल करती है।
कॉल पर उसकी आवाज़ काँप रही होती है।
वह सिर्फ़ इतना कहती है—
“भैया… अगर मैं सुबह तक वापस न आऊँ, तो मेरी डायरी पढ़ लेना।”
इसके बाद कॉल कट जाती है।
सुबह उसकी कार शहर के बाहर सुनसान सड़क पर मिलती है।
फोन टूटा हुआ होता है।
डायरी गायब होती है।
और लड़की का कोई पता नहीं चलता।
परिवार इसे अपहरण मानता है।
पुलिस इसे भाग जाने का मामला बताती है।
लेकिन उसका भाई जानता है कि उसकी बहन कभी बिना वजह गायब नहीं हो सकती।
जैसे-जैसे वह उस रात की आखिरी कॉल का सच खोजता है, उसे पता चलता है कि उसकी बहन किसी ऐसे राज़ के करीब पहुँच चुकी थी, जिसे छुपाने के लिए कई लोग किसी भी हद तक जा सकते थे।
अब सवाल यह नहीं कि वह कहाँ गई।
सवाल यह है—
उसने आखिरी कॉल में डायरी का नाम क्यों लिया?
और वह डायरी किसका सच छुपाए बैठी थी?
All Chapters
- Chapter 1: आखिरी कॉल की गूँज
- Chapter 2: टूटी हुई कार और खोई डायरी
- Chapter 3: परिवार की टूटती दीवारें
- Chapter 4: पुलिस की संदिग्ध जाँच
- Chapter 5: पुरानी यादों के अंधेरे कोने
- Chapter 6: झूठे गवाह और छिपे चेहरे
- Chapter 7: शहर का दबा हुआ अपराध
- Chapter 8: डायरी के टूटे पन्ने
- Chapter 9: सच का अंतिम संघर्ष
- Chapter 10: उस रात का अंतिम रहस्य
