अपनी माँ की मृत्यु के बाद 31 वर्षीय wildlife sound-recordist ईशान रावत उत्तराखंड के पहाड़ों में बसे अपने पुश्तैनी गाँव भैरवगढ़ लौटता है। गाँव में सूर्यास्त के बाद कोई अकेला बाहर नहीं निकलता। हर घर के दरवाज़े पर अंदर रहने वाले लोगों के नाम लिखे हैं और रात सोने से पहले परिवार एक-दूसरे के नाम जोर से बोलते हैं। ग्रामीण इसे पुरानी परंपरा कहते हैं, लेकिन पहली ही रात ईशान जंगल से ऐसी आवाज़ record करता है जो उसकी मृत माँ की आवाज़ में उसका नाम पुकारती है। अगले दिन गाँव का एक बूढ़ा आदमी गायब मिलता है—और सबसे डरावनी बात यह है कि शाम तक गाँव के अधिकांश लोग भूल चुके होते हैं कि वह आदमी कभी वहाँ रहता भी था।
All Chapters
- अध्याय 1 – रात में अपना नाम मत सुनना
- अध्याय 2 – माँ की आवाज़
- अध्याय 3 – जिसे गाँव भूल गया
- अध्याय 4 – हर दरवाज़े पर एक नाम
- अध्याय 5 – हम बचपन में दो थे
- अध्याय 6 – अंश कौन था?
- अध्याय 7 – जंगल में जो नाम पुकारता है
- अध्याय 8 – 12:44
- अध्याय 9 – अब लोग मुझे भूल रहे हैं
- अध्याय 10 – निशाचर किसे ले जाता है?
- अध्याय 11 – उस रात अंश गायब नहीं हुआ था
- अध्याय 12 – निशाचर
