एक सुनसान हाईवे पर हुई एक अनजान मुलाकात दो जिंदगियों की दिशा बदल देती है।
बारिश की रात, खराब कार, बंद मोबाइल नेटवर्क और दूर-दूर तक फैला सन्नाटा।
अद्विका अकेली सफर कर रही होती है, जब उसकी कार अचानक हाईवे के बीच रुक जाती है।
उसी समय वहाँ विराज नाम का एक अजनबी आता है।
वह मदद करता है, लेकिन उसकी आँखों में कुछ ऐसा रहस्य है जिसे अद्विका समझ नहीं पाती।
धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत शुरू होती है।
डर, भरोसा, शक और आकर्षण एक साथ बढ़ते हैं।
लेकिन अद्विका को जल्द एहसास होता है कि यह मुलाकात इत्तेफाक नहीं थी।
उस हाईवे पर उस रात कुछ ऐसा हुआ था जिसे कोई छुपा रहा है।
क्या विराज सचमुच मददगार है?
या वह उसी रहस्य का हिस्सा है जिससे अद्विका भाग रही है?
