भोपाल की नैना सक्सेना ने जिंदगी से कभी बहुत बड़ी उम्मीदें नहीं माँगी थीं।
उसे बस अपनी बेटी आन्वी के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और प्यार भरी दुनिया चाहिए थी।
लेकिन एक सिंगल मदर के लिए समाज हर रास्ते पर सवाल रखता है।
कभी उसके चरित्र पर।
कभी उसकी परवरिश पर।
कभी उसके अकेलेपन पर।
नैना ने अकेले अपनी बेटी को पालते हुए नौकरी, घर, रिश्तेदारों की बातें और समाज की तिरछी नज़रों से लड़ना सीखा था।
वह मजबूत थी, लेकिन थकी हुई भी।
तभी उसकी जिंदगी में वापस आता है वेदांत कपूर — उसका पुराना परिचित, जो कभी उसके अतीत का अधूरा हिस्सा था।
वेदांत की वापसी नैना के जीवन में उम्मीद भी लाती है और डर भी।
क्या नैना अपने पुराने दर्द से बाहर आकर किसी नए रिश्ते को जगह दे पाएगी?
क्या आन्वी अपनी माँ की जिंदगी में किसी और को स्वीकार कर पाएगी?
और सबसे बड़ा सवाल —
क्या एक सिंगल मदर को भी प्यार, सम्मान और दूसरी शुरुआत का अधिकार है?
