कमला देवी, 58 साल की एक साधारण गृहिणी, दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय मोहल्ले में रहती थीं। तीन बच्चे – बड़ी बेटी रेखा (35 साल, शादीशुदा, दो बच्चों की माँ), बेटा अजय (32 साल, नौकरीपेशा, शादीशुदा), और सबसे छोटी बेटी नेहा (28 साल, नौकरी करती है, अविवाहित)। कमला की मौत अचानक दिल का दौरा पड़ने से हुई। मौत के बाद उनके कमरे की अलमारी में एक पुरानी लाल डायरी मिली, जिस पर लिखा था – “मेरे बच्चों के लिए। मेरे जाने के बाद पढ़ना।”
डायरी पढ़ते-पढ़ते तीनों बच्चों को पता चलता है कि माँ ने सालों तक कितने राज़ छुपाए – पति का अफेयर, गोद ली हुई बेटी, बीमारी के दौरान दिए गए बलिदान, और एक ऐसा सच जो परिवार को हमेशा के लिए बदल देता है। डायरी के पन्ने परिवार में झगड़े, आंसू, माफी और अंत में एकजुटता लाते हैं। यह कहानी माँ की कुर्बानी, बच्चों के अहंकार और परिवार की हीलिंग की है।
