शादी को अभी सिर्फ़ तीन दिन हुए थे…
पूरा परिवार नई बहू अनन्या के आने की खुशियों में डूबा था।
लेकिन पहली ही रात…
कुछ ऐसा हुआ…
जिसने पूरे घर की नींद छीन ली।
सुबह जब आर्यन की आँख खुली…
तो बिस्तर खाली था।
कुछ देर बाद…
अनन्या घर के पीछे वाले बगीचे से लौटती दिखाई दी।
उसके कपड़ों पर मिट्टी लगी थी…
हाथों पर खरोंचें थीं…
और चेहरे पर अजीब निशान।
जब उससे पूछा गया…
तो उसने सिर्फ़ इतना कहा—
“मुझे कुछ याद नहीं…”
सबने इसे थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया।
लेकिन…
अगली रात भी वही हुआ।
फिर तीसरी रात…
फिर चौथी…
हर सुबह…
वही निशान…
वही सन्नाटा…
और वही जवाब—
“मुझे कुछ याद नहीं…”
धीरे-धीरे…
घर में डर फैलने लगा।
क्या अनन्या किसी गहरे सदमे से गुजर रही थी?
क्या कोई उसे हर रात घर से बाहर ले जा रहा था?
या इस परिवार का कोई पुराना राज़…
अब फिर से जाग चुका था?
सच क्या था…
यह किसी ने नहीं सोचा था।
All Chapters
- अध्याय 1 – पहली रात का सन्नाटा
- अध्याय 2 – बार-बार गायब होना
- अध्याय 3 – परिवार में फैलता डर
- अध्याय 4 – पुरानी छतरी और दादी की चुप्पी
- अध्याय 5 – डॉक्टर की जांच और छिपे सुराग
- अध्याय 6 – आर्यन की खोज और पहला ट्विस्ट
- अध्याय 7 – इंस्पेक्टर कबीर का प्रवेश
- अध्याय 8 – अतीत की परछाइयाँ और बढ़ता संदेह
- अध्याय 9 – सच्चाई की ओर
- अध्याय 10 – अंतिम रहस्य और न्याय
