एक किताब… हज़ार सवाल

एक किताब… हज़ार सवाल
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पुरानी शहर लाइब्रेरी…
जहाँ वर्षों से…
कोई नई किताब नहीं आई थी।
एक दिन…
इतिहास शोधकर्ता शौर्य वर्मा को…
धूल से ढकी…
बिना नाम वाली…
एक पुरानी किताब मिली।

उसके पहले पन्ने पर सिर्फ़ एक पंक्ति लिखी थी—
“जो भी सवाल पूछोगे… जवाब इसी किताब में मिलेगा।”
शौर्य ने इसे मज़ाक समझा।
उसने पहला सवाल लिखा।
अगले ही पल…
किताब के खाली पन्ने पर…
स्याही अपने आप उभरने लगी।
जवाब सही था।

दूसरा सवाल…
फिर सही जवाब।
लेकिन…
हर जवाब के साथ…
एक नई घटना घटने लगी।
कुछ लोग गायब होने लगे…
कुछ पुराने राज़ खुलने लगे…
और कुछ लोग…
हर कीमत पर…
उस किताब को हासिल करना चाहते थे।

अब सवाल था—
क्या किताब सचमुच जवाब देती थी…
या…
कोई वर्षों से…
हर सवाल का जवाब पहले से तैयार कर रहा था?

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