पच्चीस साल पहले…
एक धार्मिक मेले की भीड़ में…
सिर्फ़ पाँच साल का…
आर्यवीर सिंह…
अचानक गायब हो गया।
पूरे शहर में…
उसकी तलाश हुई।
पोस्टर लगे…
इनाम घोषित हुआ…
लेकिन…
वह कभी नहीं मिला।
समय बीत गया।
माँ ने…
हर त्योहार पर…
उसके लिए एक थाली सजानी नहीं छोड़ी।
पिता ने…
उसे मृत मानकर…
अपना दिल पत्थर बना लिया।
छोटा भाई…
बड़ा होकर…
परिवार का कारोबार संभालने लगा।
सबने मान लिया…
कि वह अब कभी नहीं लौटेगा।
लेकिन…
एक दिन…
दरवाज़े पर…
एक अनजान युवक आया।
उसने कहा—
“मैं आर्यवीर हूँ…”
और फिर…
उसने ऐसी बातें बताईं…
जो सिर्फ़ उसी खोए हुए बच्चे को पता हो सकती थीं।
लेकिन…
उसके पास…
ऐसे राज़ भी थे…
जो पूरे परिवार को…
अंदर से तोड़ सकते थे।
All Chapters
- अध्याय 1 — खोया हुआ बच्चा
- अध्याय 2 — पच्चीस साल बाद
- अध्याय 3 — क्या यही आर्यवीर है?
- अध्याय 4 — पहचान की परीक्षा
- अध्याय 5 — बंद कमरों के राज़
- अध्याय 6 — पुरानी डायरी
- अध्याय 7 — झूठ की विरासत
- अध्याय 8 — असली गुनहगार
- अध्याय 9 — पिता का सबसे बड़ा सच
- अध्याय 10 — परिवार बिखर गया
- अध्याय 11 — आख़िरी गवाही
- अध्याय 12 — लौटा हुआ बेटा
