अनामिका सक्सेना…
पचास वर्ष की उम्र में…
अपने ही घर में मेहमान जैसी महसूस करने लगी थी।
बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त थे।
पति अपने काम में।
घर चलता था…
लेकिन उसके बिना भी सब चलने लगा था।
एक दिन…
पुरानी अलमारी साफ़ करते हुए…
उसे कॉलेज का पहचान पत्र मिला।
उस पर लिखा था—
“अनामिका सक्सेना — गोल्ड मेडलिस्ट”
वह देर तक उस तस्वीर को देखती रही।
उसे याद ही नहीं था…
कि कभी उसके भी सपने थे।
उसी दिन…
उसने तय किया—
अब वह किसी की परछाईं बनकर नहीं…
अपनी दूसरी पहचान बनाकर जिएगी।
