राजगढ़ की सौ साल पुरानी रुद्र हवेली वर्षों से बंद पड़ी थी।
गाँव में अफ़वाह थी कि हवेली में आधी रात को अमीर और प्रभावशाली लोग गुप्त रूप से मिलते हैं।
किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी।
जो भी देखने की कोशिश करता…
वह अगले दिन या तो गायब मिलता…
या मृत।
जब युवा पत्रकार विराज त्रिवेदी को एक अनाम चिट्ठी मिली—
“अगर सच जानना है… तो अमावस्या की रात हवेली पहुँचना।”
वह कैमरा लेकर हवेली पहुँचा।
रात के ठीक बारह बजे…
पुराना दरवाज़ा खुला।
कुछ लोग अंदर गए।
और फिर…
एक ऐसी चीख सुनाई दी…
जो पूरे गाँव में गूँज उठी।
सुबह…
हवेली के आँगन में…
एक लाश पड़ी थी।
लेकिन…
वह व्यक्ति रात को अंदर जाते हुए कैमरे में दिखाई ही नहीं दिया था।
