दादी सावित्री देवी की मृत्यु के बाद 32 वर्षीय खोजी पत्रकार अनिरुद्ध अवस्थी पंद्रह साल बाद अपने पुश्तैनी घर लौटता है। अंतिम संस्कार के बाद दादी की अलमारी में उसे अपने नाम का सीलबंद लिफाफा मिलता है—अंदर एक पुरानी पीतल की चाबी, सत्रह साल पुरानी पारिवारिक तस्वीर और तीन पंक्तियाँ। घर के नक्शे में वह कमरा नहीं है जिसका जिक्र दादी ने किया है। उसी रात 1:17 बजे लाइब्रेरी की दीवार के पीछे तीन दस्तकें सुनाई देती हैं। अगली सुबह दीवार के पीछे एक बंद कमरा खुलता है और उसके अंदर एक दूसरी तस्वीर—जिसमें अनिरुद्ध के माता-पिता के बीच एक ऐसी लड़की खड़ी है जिसे परिवार का कोई सदस्य पहचानने को तैयार नहीं।
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- अध्याय 1 – वह कमरा जो घर में नहीं था
- अध्याय 2 – तस्वीर में वह लड़की कौन है?
- अध्याय 3 – उसका नाम रहस्य था
- अध्याय 4 – मेरी यादों में वह क्यों नहीं है?
- अध्याय 5 – इस घर में एक बच्ची छिपाई गई थी
- अध्याय 6 – सब लोग अलग कहानी क्यों बता रहे हैं?
- अध्याय 7 – रहस्य अवस्थी या रहस्य शर्मा?
- अध्याय 8 – उस रात मैंने दरवाज़ा बंद किया था
- अध्याय 9 – जिसकी कोई Missing Report नहीं थी
- अध्याय 10 – दादी ने किसे बचाया था?
- अध्याय 11 – रहस्य उस रात मरी नहीं थी
- अध्याय 12 – रहस्य
