नींद का करार

नींद का करार
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काल्पनिक महानगर समरगढ़ में रहने वाले विहान रस्तोगी और अदिरा रस्तोगी की शादी को सात वर्ष हो चुके थे।
बाहर से उनका जीवन व्यवस्थित था।
सुंदर घर।
स्थिर करियर।
दोस्त।
यात्राएँ।
और सोशल मीडिया पर एक लगभग आदर्श रिश्ता।
लेकिन पिछले दो वर्षों से…
उनकी शादी के भीतर कई अनकहे डर जमा हो चुके थे।
विहान को अपने पिता की अचानक मृत्यु के बाद रात में घबराहट और बंद जगहों से असहजता होने लगी थी।
अदिरा को लगातार यह डर सताता था कि एक दिन विहान उसे छोड़ देगा।
इन डरों ने धीरे-धीरे उनके रिश्ते को बदल दिया।
प्यार मौजूद था…
लेकिन उसके साथ नियंत्रण, reassurance और dependency भी बढ़ने लगी थी।
तभी उनकी मुलाकात होती है प्रसिद्ध लेकिन विवादास्पद sleep-therapist—
डॉ. इरावन कश्यप से।
उसका निजी केंद्र शहर से दूर स्थित है—
SOMA Institute for Sleep & Identity
इरावन दावा करता है कि वह डर का इलाज केवल जागते हुए व्यक्ति से बात करके नहीं करता।
उसके अनुसार—
“इंसान दिन में अपने डर से झूठ बोल सकता है।
नींद में नहीं।”
वह दोनों को एक experimental twelve-night program प्रस्तावित करता है।
पहली तीन रातों के परिणाम अविश्वसनीय होते हैं।
विहान वर्षों बाद बिना घबराहट सोता है।
अदिरा अकेले कमरे में रह पाती है।
उनके nightmares कम हो जाते हैं।
लेकिन…
इसके साथ कुछ और बदलने लगता है।
उनकी पसंद।
उनकी महत्वाकांक्षाएँ।
उनकी intimacy।
उनके भविष्य की योजनाएँ।
यहाँ तक कि…
एक-दूसरे के प्रति उनकी भावनाएँ।
पाँचवीं सुबह अदिरा अपनी पुरानी डायरी पढ़ती है।
उसमें लिखा है—
“मैं हमेशा अपना खुद का स्टूडियो खोलना चाहती हूँ।”
अदिरा पन्ने को देर तक देखती रहती है।
क्योंकि…
उसे पूरा विश्वास है…
उसने जिंदगी में कभी ऐसा कुछ चाहा ही नहीं।
और उसी रात…
विहान को अपने फोन में अपनी ही आवाज़ की एक recording मिलती है—
“अगर कल मैं कहूँ कि मैं therapy जारी रखना चाहता हूँ…
तो मेरी बात मत मानना।”
विहान को…
वह recording बनाने की…
कोई याद नहीं।

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