रात का पोर्ट्रेट

रात का पोर्ट्रेट
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राजस्थान के काल्पनिक शहर रत्नगढ़ के बाहर स्थित विरासत महल में चौहान परिवार की पाँच पीढ़ियों का एक विशाल तेलचित्र लगा था।
यह चित्र परिवार के संस्थापक विरेंद्रनाथ चौहान ने बनवाया था।
परिवार की परंपरा थी—
“जब तक यह चित्र दीवार पर है, परिवार सुरक्षित है।”
किसी ने इस वाक्य को गंभीरता से नहीं लिया।
लेकिन परिवार के बुज़ुर्ग मुखिया देवांश चौहान की मृत्यु के बाद पोर्ट्रेट बदलने लगा।
पहली रात…
सबसे छोटे बेटे ईश्वान के पीछे चित्र में टूटा हुआ शीशा दिखाई दिया।
अगले दिन…
उसकी कार का विंडस्क्रीन सड़क पर अचानक टूट गया।
दूसरी रात…
चित्र में बड़ी बहू के गले से हार गायब था।
अगली सुबह…
परिवार की सबसे पुरानी तिजोरी खुली मिली और वही हार गायब था।
तीसरी रात…
चित्र में एक सदस्य का चेहरा…
धीरे-धीरे…
धुंधला पड़ने लगा।
अगले दिन…
वह व्यक्ति रहस्यमय तरीके से लापता हो गया।
मामला पुलिस तक पहुँचता है।
जांच की जिम्मेदारी एसीपी अनायशा रावल को दी जाती है।
उनके साथ डिजिटल इमेजिंग विशेषज्ञ डॉ. युविर सेन, व्यवहार विश्लेषक डॉ. मेहरांश कौल और कला संरक्षण विशेषज्ञ सहर मलिक पोर्ट्रेट की परतों, हवेली के कैमरों और परिवार के भविष्य से जुड़े संकेतों की जांच शुरू करते हैं।
लेकिन…
जल्द ही उन्हें पता चलता है—
चित्र भविष्य नहीं देख रहा।
वह केवल…
ऐसी घटनाओं के संकेत दे रहा है…
जो पहले से योजनाबद्ध हैं।

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