आगे बढ़ने से पहले:
इस कहानी में ऐसे विषय और भाषा-शैली हो सकती है जो हर पाठक के लिए सहज न हो।
कृपया अपनी समझ और विवेक से आगे बढ़ें।
काल्पनिक महानगर नवरंगपुर में पिछले 26 वर्षों से एक विचित्र urban legend मौजूद है। लोग उसे अलग-अलग नाम देते हैं— “काला दरवाज़ा”, “भूला कमरा”, “दूसरी तरफ”। लेकिन police records में उससे जुड़े cases का unofficial नाम है— Lost Door Cases।
हर case में तीन समानताएँ हैं। पहली— किसी ऐसी जगह दरवाज़ा दिखाई देना जहाँ architectural plan में कोई door नहीं। दूसरी— दरवाज़ा कुछ मिनटों बाद गायब हो जाना। तीसरी— उससे गुजरने वाले व्यक्ति की identity में धीरे-धीरे बदलाव।
1999 में एक professor अपने घर से गायब हुआ। तीन दिन बाद वापस आया। पत्नी को पहचानता था। बच्चों को पहचानता था। अपना profession जानता था। लेकिन उसे अपना नाम याद नहीं था। दो महीने बाद उसने दावा किया— वह professor कभी था ही नहीं।
2008 में एक विवाहित महिला दरवाज़े से होकर वापस आई। उसे अपने पति के साथ बिताए बारह वर्षों की कोई याद नहीं थी। लेकिन उसे एक ऐसे आदमी की पूरी जिंदगी याद थी जिससे वह कभी मिली ही नहीं थी।
2017 में एक businessman गायब हुआ। वापस आया। उसके fingerprints वही। DNA वही। चेहरा वही। लेकिन उसकी childhood memories किसी दूसरे missing व्यक्ति की थीं।
अब 2026 में… वही दरवाज़ा अद्विका के bedroom में दिखाई दिया है। और उसके पति ने उसे भूलना शुरू कर दिया है।
All Chapters
- अध्याय 1 – दीवार पर नया दरवाज़ा
- अध्याय 2 – तुम कौन हो?
- अध्याय 3 – 27 खोई पहचानें
- अध्याय 4 – मेरी याद, तुम्हारी जिंदगी
- अध्याय 5 – जो वापस आया था
- अध्याय 6 – दरवाज़ा जगह बदलता है
- अध्याय 7 – विराज के पिता
- अध्याय 8 – पहचान की चोरी
- अध्याय 9 – दूसरी तरफ
- अध्याय 10 – असली अद्विका कौन?
- अध्याय 11 – मेरा नाम याद रखना
- अध्याय 12 – खोया हुआ दरवाज़ा
