आगे बढ़ने से पहले:
इस कहानी में ऐसे विषय और भाषा-शैली हो सकती है जो हर पाठक के लिए सहज न हो।
कृपया अपनी समझ और विवेक से आगे बढ़ें।
काल्पनिक महानगर निशागढ़ में रहने वाली तृषिका वर्मन 31 वर्षीय crime-fiction editor है। वह दूसरों की डरावनी कहानियों में plot holes खोजती है। लेकिन अब उसके पास ऐसी कहानी है जिसका अगला अध्याय लिखने वाला कोई दिखाई नहीं देता। युगांश की मृत्यु के बाद पुलिस इसे दुर्घटना मानती है। तृषिका नहीं। क्योंकि किताब में उसकी मृत्यु का संकेत कई घंटे पहले लिखा जा चुका था। वह किताब जलाने की कोशिश करती है। अगली सुबह किताब उसकी bedside table पर वापस मिलती है। वह पन्ने फाड़ती है। रात में पन्ने वापस आ जाते हैं। वह किताब घर से दूर छोड़ आती है। 2:17 बजे उसकी आँख खुलती है। किताब उसके तकिए के पास है। और उस पर लिखा है— “कहानी छोड़कर लेखक से नहीं भागा जाता।” इसके बाद हर रात एक नया chapter। हर chapter में किसी व्यक्ति की छिपी इच्छा, उसके रिश्तों का सच, उसका guilt, उसकी jealousy, उसका obsession। और अगले दिन एक नई मौत। लेकिन चौथी मौत के बाद investigating officer एसीपी रुद्रांश कौल एक असंभव pattern खोजता है— जिन लोगों की मौत हुई, उनमें से हर व्यक्ति कभी न कभी उसी काली किताब का मालिक रह चुका था।
All Chapters
- अध्याय 1 – खाली किताब
- अध्याय 2 – रात 2:17
- अध्याय 3 – तुम्हारी सबसे गंदी इच्छा
- अध्याय 4 – जिस रात उसने मुझे चाहा
- अध्याय 5 – पाँचवाँ शव
- अध्याय 6 – किताब का पिछला मालिक
- अध्याय 7 – इच्छाओं का कमरा
- अध्याय 8 – जो मैंने कभी नहीं चाहा
- अध्याय 9 – काली स्याही का लेखक
- अध्याय 10 – मौत कौन लिख रहा है?
- अध्याय 11 – मेरी आख़िरी इच्छा
- अध्याय 12 – काली दास्तान
