सात ताले, एक लाश

सात ताले, एक लाश
Text size
👁 14,520 views

राजगढ़ हवेली…
करीब सौ साल पुरानी…
और…
अपने सात लोहे के दरवाज़ों के लिए मशहूर।
हर दरवाज़े पर…
एक अलग ताला।
हर चाबी…
एक अलग सदस्य के पास।

उस रात…
हवेली के मालिक…
वीरेन्द्र प्रताप सिंह
अपने निजी कमरे में गए।
सभी सात दरवाज़े…
अंदर और बाहर से…
सुरक्षित बंद कर दिए गए।

सुबह…
जब सातों ताले खोले गए…
तो कमरे के बीचों-बीच…
वीरेन्द्र प्रताप की लाश पड़ी थी।
कमरे की खिड़कियाँ बंद थीं।
छत सलामत थी।
कोई गुप्त सुरंग नहीं।
कोई हथियार नहीं।
कोई उंगलियों के निशान नहीं।
बस…
दीवार पर…
खून से लिखा एक वाक्य—
“सात ताले… सच को कभी कैद नहीं कर सकते।”

All Chapters

Leave a Reply

Scroll to Top