काल्पनिक पहाड़ी शहर मृत्युगढ़ के बाहर स्थित है—
वर्धन हवेली।
1886 में बनी यह हवेली कभी राजसी परिवार की गर्मियों की कोठी थी।
आज लगभग वीरान।
लेकिन एक चीज़ अब भी पूरी तरह सुरक्षित है—
उसकी विशाल काली लकड़ी की मुख्य सीढ़ियाँ।
स्थानीय कथा के अनुसार…
इन सीढ़ियों का निर्माण एक ऐसे वास्तुकार ने किया था जो मानता था—
“हर घर में ऊपर जाने का रास्ता होता है।
लेकिन कुछ रास्ते लौटने के लिए नहीं बनाए जाते।”
पिछले सौ वर्षों में हवेली से 17 लोग गायब हुए।
सभी के disappearance में एक ही समानता—
उन्हें आख़िरी बार…
रात में…
मुख्य सीढ़ियों पर ऊपर जाते देखा गया।
कोई body नहीं।
कोई blood trail नहीं।
कोई बाहर निकलने का record नहीं।
1998 में हवेली permanently seal कर दी गई।
लेकिन अब…
परिवार की आख़िरी उत्तराधिकारी वसुधा वर्धन की मृत्यु के बाद हवेली बेचने की तैयारी है।
Heritage conservation consultant इरा मेहता को structure document करने के लिए भेजा जाता है।
उसके साथ कुछ और लोग हवेली में रुकते हैं—
architect,
lawyer,
documentary filmmaker,
family representative,
और एक investigator।
पहली रात…
सीढ़ियाँ बढ़ती हैं।
दूसरी रात…
एक व्यक्ति गायब हो जाता है।
तीसरी रात…
ऊपरी landing पर उसका फोन मिलता है।
Phone में आख़िरी video—
वह लगातार ऊपर चढ़ रहा है।
लेकिन video में…
सीढ़ियाँ खत्म ही नहीं होतीं।
और background में…
कोई कह रहा है—
“अगली मंज़िल पर वही मिलेगा जो तुम सबसे ज्यादा चाहते हो।”
All Chapters
- अध्याय 1 — सत्ताईस सीढ़ियाँ
- अध्याय 2 — जो ऊपर गया
- अध्याय 3 — सीढ़ियाँ खत्म क्यों नहीं होतीं?
- अध्याय 4 — मेरे पिता भी यहाँ थे
- अध्याय 5 — 1998 के सात लोग
- अध्याय 6 — चालीसवीं सीढ़ी
- अध्याय 7 — सीढ़ियों के पीछे का घर
- अध्याय 8 — जो वापस आया था
- अध्याय 9 — ऊपर कौन रहता है?
- अध्याय 10 — आरव की आवाज़
- अध्याय 11 — सौवीं सीढ़ी
- अध्याय 12 — काली सीढ़ियाँ
