राजस्थान की…
एक वीरान हवेली…
चंद्रकोट महल…
जहाँ…
सौ वर्षों से…
कोई स्थायी रूप से नहीं रहा।
कहा जाता था…
महल की लाइब्रेरी में…
एक ऐसी डायरी छिपी है…
जिसमें…
हर मालिक ने…
अपनी सबसे गुप्त इच्छा लिखी थी।
लेकिन…
उनमें से…
कोई भी…
स्वाभाविक मृत्यु नहीं मर पाया।
जब…
युवा इतिहासकार…
आर्यमान शेखावत…
महल के दस्तावेज़ों का अध्ययन करने पहुँचता है…
उसे…
वही डायरी मिलती है।
पहले…
वह…
उसे…
सिर्फ़…
एक पुरानी किताब समझता है।
लेकिन…
जैसे ही…
वह पहला पन्ना पढ़ता है…
उसे…
रातों में…
कोई…
फुसफुसाकर कहने लगता है—
“अपनी सच्ची इच्छा लिखो…”
