राजस्थान के…
बूँदी के पास…
स्थित…
रुद्रगढ़ हवेली…
जहाँ…
हर दीवार…
एक कहानी छिपाए बैठी थी।
हवेली का…
सबसे पुराना तहखाना…
पिछले…
साठ वर्षों से…
बंद था।
परिवार का नियम था—
“जिसे चाबी मिले…
वह किसी से कुछ नहीं पूछेगा…
और तहखाना कभी नहीं खोलेगा।”
लेकिन…
नियम…
उसी दिन टूट जाता है…
जब…
युवान…
डर के मारे…
चाबी…
पूरे परिवार को दिखा देता है।
अगली सुबह…
परिवार का…
एक सदस्य…
मृत मिलता है।
और…
तहखाने का…
ताला…
पहली बार…
खुला हुआ दिखाई देता है।
मामले की जांच…
एसीपी अथर्व राठौड़ को सौंपी जाती है।
उनके साथ…
फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. ईरा सक्सेना…
और…
इतिहास शोधकर्ता अन्वी चौहान…
उस तहखाने तक पहुँचते हैं…
जहाँ…
सिर्फ़…
एक कमरा नहीं…
बल्कि…
तीन पीढ़ियों का…
सबसे बड़ा झूठ…
कैद था।
