काल्पनिक मध्य भारतीय शहर नूरखेड़ा के बाहरी हिस्से में स्थित है—सफ़ेद पीर कब्रिस्तान। स्थानीय records के अनुसार इसका निर्माण 1856 के आसपास हुआ। लेकिन कब्रिस्तान के बीच एक ऐसी कब्र है जो उससे भी पुरानी मानी जाती है। न कोई तारीख। न कोई धार्मिक चिह्न। न कोई नाम। सिर्फ़ पत्थर पर एक पुरानी पंक्ति—“जिसका नाम यहाँ लिखा जाए, उसकी जगह खाली हो चुकी है।” लोग इसे कहते हैं—जागती कब्र। कहानी के अनुसार हर कुछ वर्षों में उस कब्र पर किसी जीवित व्यक्ति का नाम दिखाई देता है। रात में उसी व्यक्ति जैसा कोई कब्रिस्तान में दिखाई देता है। और अगली सुबह वास्तविक व्यक्ति गायब। लेकिन पिछले तीन महीनों में यह घटना अचानक बहुत तेज़ हो गई है। एक शिक्षक। एक दुकानदार। एक retired police officer। एक 27 वर्षीय महिला। और एक local historian। पाँच लोग गायब। पाँचों के नाम अब कब्र की अलग-अलग पत्थर की पट्टियों पर खुदे हैं। पुलिस इसे connected missing-person case मानती है। स्थानीय लोग कहते हैं—“कब्र भूखी हो गई है।” वामिका इस कहानी की investigation शुरू करती है। लेकिन उसे नहीं पता—उसका अपना परिवार इस कब्र से लगभग तीन पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है। और उसके भाई विहान की ग्यारह वर्ष पुरानी मृत्यु… शायद accident नहीं थी।
