अंधेरे की गली

अंधेरे की गली
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मध्यप्रदेश का काल्पनिक पुराना शहर विरक्तपुर दो हिस्सों में बँटा था। एक तरफ आधुनिक शहर—मॉल, अपार्टमेंट, फ्लाईओवर और रोशनी। दूसरी तरफ पुराना विरक्तपुर—संकरी गलियाँ, हवेलियाँ, पुराने बाजार और ऐसे घर जिनके इतिहास उनके रहने वालों से भी पुराने थे। इसी पुराने शहर के बीच थी—रुद्र गली। लेकिन कोई उसे उस नाम से नहीं बुलाता था। स्थानीय लोगों के लिए वह थी—अंधेरे की गली। लगभग 80 मीटर लंबी गली। दिन में सैकड़ों लोग वहाँ से गुजरते। कुछ पुरानी दुकानें खुलतीं। बच्चे खेलते। पर रात 1 बजे से पहले हर दुकान बंद हो जाती। क्योंकि पीढ़ियों से एक नियम चला आ रहा था—1:13 के बाद उस गली में मत जाना। पिछले 47 वर्षों में गली से जुड़े 11 रहस्यमयी मामले दर्ज हुए थे। चार लोग हमेशा के लिए गायब। तीन मृत मिले। और चार वापस आए। लेकिन लौटे हुए चारों लोगों के परिवारों ने एक ही अजीब बात कही—“चेहरा वही था… इंसान बदल चुका था।” एक व्यक्ति अपनी पत्नी को पहचानता था… लेकिन उसे छूने से घबराता था। दूसरा अपनी पूरी जिंदगी याद रखता था… लेकिन अपनी माँ की मृत्यु पर कोई भावना नहीं दिखाता था। तीसरे ने रात में सोना बंद कर दिया। और चौथा हर रात ठीक 1:13 पर अपने घर की दीवार के सामने खड़ा होकर अपनी गायब परछाई से बातें करता था। इन मामलों को कभी मानसिक बीमारी, कभी trauma और कभी स्थानीय अंधविश्वास कहकर बंद कर दिया गया। लेकिन investigative journalist अवनि अरोड़ा ने इन कहानियों पर कभी विश्वास नहीं किया। जब तक उसका छोटा भाई कैरव उसी गली से वापस नहीं आया। अब अवनि के सामने सबसे डरावना प्रश्न था—अगर सामने बैठा व्यक्ति उसका भाई नहीं है… तो उसका असली भाई कहाँ है? और अगर वही उसका भाई है… तो वह खुद क्यों कह रहा है—“मुझे उस गली से बाहर निकालो।”

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