34 वर्षीय astrophysics researcher अद्वैत सेन माँ ईरा सेन की मृत्यु के बाद भोपाल के बाहर स्थित पुराने पारिवारिक घर लौटता है। पहली रात ठीक 12:00 पर घर की सभी घड़ियाँ एक साथ 00:00 दिखाने लगती हैं। अगले ही क्षण वह bedroom में खड़ा होता है—जबकि उसे याद है कि वह kitchen में था। Phone, CCTV और smartwatch के अनुसार कोई समय बीता ही नहीं। लेकिन दूध जल चुका है, हाथ पर ताज़ा कट है और दीवार पर उसकी अपनी handwriting में लिखा है—“अगली बार शून्य में अपनी आँखें मत खोलना।” शून्य कोई खालीपन नहीं। वह उस असंभव क्षण का नाम है जहाँ समय दर्ज नहीं होता, cameras कुछ नहीं पकड़तीं और यादों में एक ऐसा छेद रह जाता है जिसमें कुछ हुआ ज़रूर था।
All Chapters
- अध्याय 1 – 00:00
- अध्याय 2 – कोई समय नहीं बीता
- अध्याय 3 – यह संदेश मैंने लिखा था
- अध्याय 4 – तस्वीर में दूसरा बच्चा
- अध्याय 5 – आरव कौन था?
- अध्याय 6 – शून्य कोई समय नहीं है
- अध्याय 7 – वहाँ हम अकेले नहीं हैं
- अध्याय 8 – उस रात दो बच्चे अंदर गए थे
- अध्याय 9 – बाहर कौन आया था?
- अध्याय 10 – माँ ने मेरा नाम क्यों बदला?
- अध्याय 11 – शून्य के अंदर कौन रह गया?
- अध्याय 12 – शून्य
