31 वर्षीय cybersecurity analyst आरव मल्होत्रा अपनी बड़ी बहन काव्या की अचानक हुई कार दुर्घटना में मृत्यु के तीन महीने बाद भी शोक से बाहर नहीं निकल पाया है। एक रात ठीक 2:17 बजे उसके फोन पर काव्या के बंद हो चुके नंबर से संदेश आता है—“आरव, अगर तुम ये पढ़ रहे हो तो मेरी मौत accident नहीं थी।” आरव इसे scheduled message मानता है, लेकिन अगले सात दिनों में आने वाले संदेश उन घटनाओं का वर्णन करने लगते हैं जो काव्या की मृत्यु के बाद हुई थीं। सबसे डरावना संदेश तब आता है जब आरव अपने कमरे में बिल्कुल अकेला होता है—“पीछे मत देखना। जिसने मुझे मारा था, उसे अब पता है कि तुम मेरे messages पढ़ रहे हो।”
All Chapters
- अध्याय 1 – 2:17 AM
- अध्याय 2 – मेरी मौत accident नहीं थी
- अध्याय 3 – यह message पहले से लिखा गया था
- अध्याय 4 – लेकिन ये बात उसे कैसे पता थी?
- अध्याय 5 – कोई काव्या बनकर लिख रहा है
- अध्याय 6 – पापा का पुराना phone
- अध्याय 7 – आखिरी दिन उसने क्या देखा था?
- अध्याय 8 – जिसने उसे मारा, वह messages पढ़ रहा है
- अध्याय 9 – अब सारे messages बंद हो चुके हैं
- अध्याय 10 – काव्या को अपनी मौत का पता नहीं था
- अध्याय 11 – फिर अंतिम संदेश किसने भेजा?
- अध्याय 12 – अंतिम संदेश
