लखनऊ की पुरानी हवेलियों और घुमावदार गलियों में बसी राधिका एक प्रतिभाशाली कलाकार थी। दिन में वह अपनी पेंटिंग्स में रंग भरती, लेकिन रातें उसकी होती थीं—सुनसान, अकेली, और एक रेडियो की आवाज़ से भरी। हर रात 11 बजे के बाद, वह ‘मिडनाइट मिस्ट्री’ शो सुनती, जहां एक गहरी, रहस्यमयी आवाज़ श्रोताओं की कहानियां सुनाती और सवालों के जवाब देती। वह आवाज़—जो कभी नर्म, कभी गूंजदार—राधिका के दिल को छू जाती। “कौन हो तुम?” वह अक्सर सोचती, लेकिन कभी कॉल नहीं किया। एक रात, हिम्मत जुटाकर उसने फोन उठाया। “हैलो, सुनसान आवाज़,” उसने कहा। दूसरी तरफ से हंसी आई—”मैं करण हूं, और तुम्हारी आवाज़ ने मुझे जगा दिया है।” उस रात से शुरू हुई एक अनोखी प्रेम कहानी, जो जल्द ही पुराने गुमशुदा मामलों की छाया में घिर गई। राधिका को लगने लगा कि करण की जिंदगी में कुछ छिपा है—एक दोहरी दुनिया, जहां वह मसीहा हो या खलनायक? suspense से भरी यह कहानी प्यार, रहस्य और जुनून की है, जहां हर मोड़ पर दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं।
