पिता की मृत्यु के बाद 36 वर्षीय architectural documentary filmmaker वेदांत राठौर पत्नी ईरा के साथ अपने 90 वर्ष पुराने पुश्तैनी घर लौटता है। बचपन से उसने इस हवेली जैसे मकान को “बारह दरवाज़ों वाला घर” कहते सुना है, लेकिन architectural survey में केवल 11 original doors मिलते हैं। परिवार की बुजुर्ग सदस्य मालती बुआ बताती हैं कि बारहवाँ दरवाज़ा गिना नहीं जाता क्योंकि वह हमेशा एक ही जगह दिखाई नहीं देता। पहली रात ठीक 12:12 बजे एक ऐसी दीवार पर बारहवाँ दरवाज़ा प्रकट होता है जहाँ कुछ घंटे पहले कुछ नहीं था। दरवाज़ा खोलने पर वेदांत किसी hidden room में नहीं, बल्कि 28 साल पुराने उसी घर में पहुँचता है, जहाँ उसका परिवार एक ऐसी रात की घटना पर बहस कर रहा है जिसके बारे में हर व्यक्ति की कहानी अलग है।
All Chapters
- अध्याय 1 – बारह दरवाज़ों वाला घर
- अध्याय 2 – इस घर में केवल ग्यारह दरवाज़े हैं
- अध्याय 3 – बारहवाँ दरवाज़ा कहाँ से आया?
- अध्याय 4 – उस रात घर में बारह लोग थे
- अध्याय 5 – हर किसी को अलग रात याद है
- अध्याय 6 – रात 12:12 पर क्या रिकॉर्ड हुआ था?
- अध्याय 7 – उसे नहीं, उस फाइल को रोकना था
- अध्याय 8 – संध्या पैसे लेकर नहीं गई थी
- अध्याय 9 – सच दादी ने छिपाया था
- अध्याय 10 – घर संध्या ने नहीं तोड़ा था
- अध्याय 11 – मैंने बारहवाँ दरवाज़ा नहीं खोला
- अध्याय 12 – आख़िरी बार दरवाज़े गिने गए
