माँ की मृत्यु के बाद 34 वर्षीय आरव मल्होत्रा अपनी पत्नी नैना के साथ बाईस साल बाद उस पुश्तैनी घर लौटता है, जिसके आँगन में बच्चों का लकड़ी का झूला आज भी खाली है। परिवार ने उसे कभी हटाया नहीं, क्योंकि कहा जाता है कि बाईस वर्ष पहले आरव की नौ वर्षीय छोटी बहन कृति उसी झूले से उठकर गायब हो गई थी। पहली रात ठीक 2:24 बजे, जब बाहर हवा बिल्कुल बंद है, झूला अपने आप हिलने लगता है। आरव उसे रोकता है तो सीट के नीचे खुरचे हुए दो शब्द दिखाई देते हैं—“मैं गई नहीं।” आगे की जाँच में यादें टूटती हैं, फ़ोटो झूठ बोलती हैं, और परिवार का सबसे पुराना इंतज़ार एक ऐसे सच की तरफ़ खुलता है जिसे आरव ने कभी पूछा ही नहीं था—कि कृति वास्तव में कौन थी, और जिस जगह को उसने बाईस साल खाली रखा, वह जगह असल में किसकी थी।
All Chapters
- अध्याय 1 – खाली झूला
- अध्याय 2 – मेरी जगह किसी को मत देना
- अध्याय 3 – रात 2:24
- अध्याय 4 – कृति मेरी बहन नहीं थी?
- अध्याय 5 – उस रात झूला पहले ही खाली था
- अध्याय 6 – मौसी की गाड़ी में कौन बैठा था?
- अध्याय 7 – रेखा का सच
- अध्याय 8 – परिवार की खामोशी
- अध्याय 9 – कृति ग़ायब नहीं हुई थी
- अध्याय 10 – मृत्यु प्रमाणपत्र
- अध्याय 11 – झूले का आख़िरी झूठ
- अध्याय 12 – खाली झूले का फ़ैसला
