Emotional

आत्म-स्वीकार

आत्म-स्वीकार

पंद्रह साल पहले…एक फैसला लिया गया था।उस फैसले ने किसी की जान नहीं ली…लेकिन कई ज़िंदगियाँ अधूरी कर दीं। समय […]

गुप्त कारोबार

गुप्त कारोबार

पिता की मृत्यु को…सिर्फ़ दस दिन हुए थे।परिवार अभी…उनके जाने के दुख से…उबर भी नहीं पाया था।तभी…बैंक से फोन आया।उनके

दूसरी पहचान

दूसरी पहचान

अनामिका सक्सेना…पचास वर्ष की उम्र में…अपने ही घर में मेहमान जैसी महसूस करने लगी थी। बच्चे अपनी दुनिया में व्यस्त

मोहब्बत की आख़िरी बाज़ी

मोहब्बत की आख़िरी बाज़ी

पाँच साल पहले…अर्णव राजदेव ने…काव्या त्रिवेदी से कहा था—“अगर मैं लौटकर आया… तो हमारी कहानी पूरी होगी।”लेकिन…उसी रात…वह गायब हो

माँ की आख़िरी तस्वीर

माँ की आख़िरी तस्वीर

माँ के गुज़रे…बारह साल हो चुके थे।घर की दीवार पर…उनकी मुस्कुराती हुई…एक बड़ी तस्वीर टंगी थी। हर त्योहार…हर खुशी…हर दुख…उसी

गुप्त वारिस

गुप्त वारिस

सिंघानिया परिवार…देश के सबसे पुराने…और सबसे अमीर कारोबारी परिवारों में से एक था।अरबों की संपत्ति…कई फैक्ट्रियाँ…हज़ारों एकड़ ज़मीन…और…सदियों पुरानी हवेली।

पुराना सपना

पुराना सपना

बचपन से…हर रात…विवान चौधरी…एक ही सपना देखता था। एक पुराना रेलवे स्टेशन…बारिश…लाल छाता लिए…एक छोटी बच्ची…और…दूर खड़ा…एक सफेद कोट पहने

ब्लैक डायरी का रहस्य

ब्लैक डायरी का रहस्य

बरसों पुरानी…धूल से ढकी…एक काली डायरी…पुरानी हवेली के तहखाने से मिली।उसके पहले पन्ने पर…सिर्फ़ एक पंक्ति लिखी थी—“अगर तुम यह

मुस्कुराते चेहरे का अनकहा दर्द

मुस्कुराते चेहरे का अनकहा दर्द

हर सुबह…आर्यव…सबसे पहले मुस्कुराता था। ऑफिस में…दोस्तों के बीच…परिवार के सामने…हर जगह…उसके चेहरे पर…बस मुस्कान रहती थी।लोग कहते थे…“यार… इससे

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