कुछ कमरे सिर्फ बंद नहीं होते…
उनके अंदर वक्त, यादें और अधूरे सच कैद होते हैं।
राजस्थान के पुराने शहर चंद्रपुरगढ़ में मौजूद था एक विशाल राजमहल — सूर्यवंश महल।
सैकड़ों कमरों वाले इस महल में एक कमरा ऐसा था जिसकी तरफ जाने की इजाजत किसी को नहीं थी।
क्योंकि 80 साल पहले उस कमरे में गई थीं महारानी मृणालिनी देवी…
लेकिन वह फिर कभी वापस बाहर नहीं आईं।
उस रात के बाद महल में सन्नाटा छा गया।
राजघराने ने उस कमरे को बंद कर दिया।
सारे दस्तावेज मिटा दिए गए।
और लोगों को बस एक बात बताई गई —
“रानी चली गई।”
लेकिन कहाँ?
क्यों?
कैसे?
इसका जवाब किसी के पास नहीं था।
कई सालों बाद इतिहास की खोज करने वाली अन्विका सिंह राठौड़ इस महल में आती है।
वह इस कहानी को सिर्फ एक पुरानी अफवाह समझती थी।
लेकिन जब उसे महारानी की छुपी हुई डायरी, पुराने खत और उस रात से जुड़े निशान मिलते हैं, तो उसे एहसास होता है कि इतिहास में लिखा सच अधूरा है।
शायद रानी गायब नहीं हुई थी…
शायद किसी ने सच को हमेशा के लिए बंद कर दिया था।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं था कि रानी कहाँ गई।
सवाल यह था —
उस कमरे में ऐसा क्या हुआ था कि रानी कभी वापस नहीं आई?
All Chapters
- अध्याय 1: सूर्यवंश की छाया
- अध्याय 2: बंद कमरे की चाभी
- अध्याय 3: रानी की पहली डायरी
- अध्याय 4: विश्वासघात की पहली दरार
- अध्याय 5: अधूरे खत और छुपी हुई मोहब्बत
- अध्याय 6: युवराज का रहस्य
- अध्याय 7: उस रात की गवाही
- अध्याय 8: परिवार की इज्जत और खून
- अध्याय 9: कमरे का आखिरी द्वार
- अध्याय 10: जिस कमरे में रानी कभी वापस नहीं आई
