ग्रीष्मकालीन अवकाश की उन गर्म दोपहरों में, जब अधिकांश बच्चे घर पर विश्राम करते हैं, तब बारह वर्षीय आरव एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक विशेष ग्रीष्मकालीन शिविर की ओर प्रस्थान करता है। यह शिविर केवल खेलकूद और मस्ती का केंद्र नहीं है, अपितु भारत के राष्ट्रीय खेल—हॉकी—के प्रति युवा प्रतिभाओं को निखारने का एक अनूठा मंच है।
आरव, जो अब तक केवल स्कूल के मैदान पर हॉकी खेलता आया है, इस शिविर में पहली बार पेशेवर प्रशिक्षण प्राप्त करने जा रहा है। हरी-भरी घाटियों, ऊँचे पेड़ों और शांत वातावरण के बीच शुरू होने वाली यह यात्रा प्रथम दृष्टि में सामान्य प्रतीत होती है। परंतु जैसे-जैसे दिन बीतते हैं, शिविर के भीतर छोटी-छोटी असामान्य घटनाएँ घटित होने लगती हैं—गायब होती गेंदें, रात में टेंट से बाहर जाते छायादार आकृतियाँ, और मैदान पर अचानक उत्पन्न होने वाली फिसलन।
नीचे दिए गए चित्र इस शिविर के वातावरण को दर्शाते हैं, जहाँ बच्चे हॉकी के मैदान पर उत्साहपूर्वक अभ्यास करते हैं, तथा रात के जंगल की रहस्यमयी छवि संदेह की गहराई को व्यक्त करती है।
आरव और उसके नए मित्रों—विक्रम, सूरज तथा करण—के बीच बनती दोस्ती के साथ-साथ एक गहन रहस्य भी उभरता है। क्या यह सब महज संयोग है, अथवा शिविर के पीछे कोई गहरा षड्यंत्र छिपा हुआ है? क्या हॉकी का यह राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण शिविर मात्र खेल सिखाने के लिए है, या इसमें कोई ऐसा सच छिपा है जो आरव की हिम्मत और बुद्धि की कसौटी पर खरा उतरने वाला है?
यह कहानी एक साधारण लड़के की उस रोमांचक यात्रा का वर्णन करती है, जिसमें दोस्ती, साहस, संदेह और अंततः सत्य की खोज हॉकी के मैदान पर ही समाप्त होती है।
