कहते हैं जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब विश्वास एक नया रास्ता खोल देता है।
राजस्थान के एक छोटे से गाँव में रहने वाला मोहन व्यास एक ईमानदार लेकिन संघर्ष कर रहा व्यक्ति था। उसके पास ज्यादा धन नहीं था, लेकिन दिल में श्री सांवलिया सेठ के लिए अटूट विश्वास था।
लोग कहते थे—
“आज के जमाने में सिर्फ मेहनत चलती है, भक्ति नहीं।”
लेकिन मोहन मानता था कि मेहनत इंसान करता है और रास्ता भगवान दिखाते हैं।
कर्ज, परिवार की जिम्मेदारी और टूटते सपनों के बीच एक दिन मोहन सांवलिया सेठ के दरबार पहुँचता है। वह धन नहीं माँगता। वह बस हिम्मत माँगता है।
वहीं से शुरू होती है उसकी जिंदगी की एक ऐसी यात्रा, जहाँ मुश्किलें भी आती हैं, परीक्षा भी होती है और विश्वास भी परखा जाता है।
धीरे-धीरे उसके जीवन में ऐसे बदलाव आने लगते हैं जिन्हें कुछ लोग संयोग कहते हैं और कुछ कृपा।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह था—
क्या भगवान सच में इंसान की किस्मत बदलते हैं?
या विश्वास इंसान को इतना मजबूत बना देता है कि वह अपनी किस्मत खुद बदल देता है?
यह कहानी चमत्कार से ज्यादा विश्वास, कर्म और सांवलिया सेठ की भक्ति की शक्ति की कहानी है।
