गाँव के बाहर…
एक पहाड़ी पर बना था…
करीब चार सौ साल पुराना मंदिर।
दिन में…
वहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी।
लेकिन…
सूरज ढलते ही…
मंदिर के विशाल दरवाज़े बंद कर दिए जाते।
गाँव वालों का दावा था…
कि रात के ठीक 12 बजे…
मंदिर की घंटियाँ अपने आप बजने लगती हैं।
घंटियों की आवाज़…
पूरे गाँव में गूँजती…
लेकिन…
जब कोई हिम्मत करके अंदर जाता…
तो मंदिर बिल्कुल खाली मिलता।
न कोई पुजारी…
न कोई भक्त…
न कोई इंसान।
फिर…
घंटियाँ बजाता कौन था?
युवा इतिहास शोधकर्ता आदित्य त्रिवेदी जब इस रहस्य की खोज में गाँव पहुँचता है…
तो उसे मंदिर के गर्भगृह के नीचे बनी एक गुप्त सुरंग का संकेत मिलता है।
धीरे-धीरे…
उसे पता चलता है…
कि मंदिर में कोई चमत्कार नहीं…
बल्कि सदियों से छिपा एक ऐसा राज़ दफन है…
जिसे बचाने के लिए कई पीढ़ियों ने अपनी ज़िंदगी दाँव पर लगा दी।
अब सवाल था—
क्या आदित्य सच दुनिया के सामने ला पाएगा…
या वह भी उसी रहस्य का हिस्सा बन जाएगा?
All Chapters
- अध्याय 1: आधी रात की पहली घंटी
- अध्याय 2: गुप्त सुरंग का संकेत
- अध्याय 3: वैदेही का पहला रहस्य
- अध्याय 4: महंत हरिदास की चुप्पी
- अध्याय 5: पुरानी डायरी और खून का दाग
- अध्याय 6: इंस्पेक्टर विक्रम का शक
- अध्याय 7: सुरंग के अंदर छिपा अतीत
- अध्याय 8: रहस्यमयी संरक्षक का सामना
- अध्याय 9: सच्चाई की आखिरी दीवार
- अध्याय 10: घंटियों का असली स्वर
