कॉलेज की लाइब्रेरी…
जहाँ…
एक किताब…
दो हाथों ने…
एक साथ उठाई।
एक हाथ…
अर्णव राजदान का।
दूसरा…
ईशिता सैनी का।
एक छोटी-सी मुलाकात…
धीरे-धीरे…
दोस्ती में बदली।
दोस्ती…
मोहब्बत में।
और…
मोहब्बत…
ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत सपना बन गई।
लेकिन…
कुछ सपने…
पूरे होने के लिए नहीं…
बल्कि इंसान को बदलने के लिए आते हैं।
एक गलतफ़हमी…
एक मजबूरी…
और…
एक ऐसा फैसला…
जिसने दोनों को…
हमेशा के लिए अलग कर दिया।
सालों बाद…
जब किस्मत ने…
उन्हें फिर आमने-सामने खड़ा किया…
तो…
दोनों बदल चुके थे।
लेकिन…
दिल में दबी मोहब्बत…
आज भी…
वैसी ही थी।
