पुरानी हवेली…
जिसे वर्षों बाद…
बेचा जा रहा था।
सफाई के दौरान…
एक लकड़ी की अलमारी के पीछे…
एक पीला पड़ा लिफाफा मिला।
उस पर लिखा था—
“अगर यह चिट्ठी कभी पूरी पढ़ी जाए… तो सच सब बदल देगा।”
लिफाफे के अंदर…
एक अधूरी चिट्ठी थी।
कुछ पन्ने…
फटे हुए थे।
कुछ शब्द…
जानबूझकर मिटाए गए थे।
और आख़िरी पंक्ति…
अधूरी थी।
चिट्ठी…
करीब तीस साल पुरानी थी।
जब…
आरुष मेहता…
उस चिट्ठी के गायब हिस्सों को ढूँढने निकलता है…
तो उसे एहसास होता है…
कि यह सिर्फ़ एक प्रेम पत्र नहीं…
बल्कि…
एक ऐसे अपराध…
एक ऐसे विश्वासघात…
और…
एक ऐसे रिश्ते की कहानी है…
जिसे पूरी दुनिया से छिपा दिया गया था।
All Chapters
- अध्याय 1 — पुराना लिफाफा
- अध्याय 2 — अधूरी पंक्तियाँ
- अध्याय 3 — खोया हुआ पन्ना
- अध्याय 4 — तीस साल पुराना वादा
- अध्याय 5 — बंद अलमारी
- अध्याय 6 — झूठ की नींव
- अध्याय 7 — छिपा हुआ रिश्ता
- अध्याय 8 — आख़िरी गवाह
- अध्याय 9 — अधूरी चिट्ठी पूरी हुई
- अध्याय 10 — सबसे बड़ा सच
- अध्याय 11 — बीते समय का फैसला
- अध्याय 12 — चिट्ठी जिसने सब बदल दिया
