खोया हुआ भाई

खोया हुआ भाई
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बाईस साल पहले…
एक पहाड़ी मेले में…
आठ साल का…
अभिमन्यु चौहान…
अचानक गायब हो गया।

पुलिस…
रिश्तेदार…
पूरा गाँव…
उसे खोजता रहा।
लेकिन…
वह कभी नहीं मिला।
समय बीतता गया।
परिवार ने…
दर्द के साथ जीना सीख लिया।

छोटा भाई…
आदित्य…
बड़ा होकर…
पिता का कारोबार संभालने लगा।
सबको लगा…
अब…
अभिमन्यु सिर्फ़ एक याद है।

लेकिन…
एक बारिश भरी शाम…
हवेली का दरवाज़ा खुला।
एक अनजान आदमी…
भीतर आया।
उसने…
पुरानी पारिवारिक तस्वीर उठाई…
और मुस्कुराकर कहा—
“घर आने में बहुत देर हो गई… छोटे।”
उसकी आँखों में…
इतिहास था।
उसकी जेब में…
कुछ पुराने दस्तावेज़ थे।
और…
उसके दिल में…
ऐसे राज़…
जो पूरे परिवार को…
हमेशा के लिए बदल सकते थे

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