विरासत और जिम्मेदारी

विरासत और जिम्मेदारी
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सौ साल पुरानी “राजमहल हवेली” हमेशा से सिर्फ़ एक घर नहीं थी।
वह इस परिवार की पहचान थी।
उसके आँगन में चार पीढ़ियाँ पली थीं।

दीवारों पर लगी तस्वीरें…
सिर्फ़ चेहरे नहीं…
इतिहास थीं।

आज…
पूरे परिवार को पहली बार एक साथ बुलाया गया था।
कारण…
परिवार के मुखिया, धर्मवीर प्रताप सिंह, अपनी उम्र और स्वास्थ्य के कारण हवेली और सदियों पुराने पारिवारिक कारोबार की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को सौंपना चाहते थे।

सबको लगा…
आज केवल उत्तराधिकारी चुना जाएगा।
लेकिन…
रात के भोजन के बाद…
पुरानी तिजोरी से एक सीलबंद लिफाफा निकला।
उस पर लिखा था—
“यह पत्र मेरी मृत्यु या विरासत बाँटने से पहले कभी मत खोलना।”

जैसे ही वह पत्र खोला गया…
पूरा परिवार एक ऐसे सच के सामने खड़ा था…
जिसने वर्षों से निभाए जा रहे हर रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए।
उस रात…
सिर्फ़ विरासत नहीं…
पूरा परिवार बँटने की कगार पर पहुँच गया।

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