दिल्ली विश्वविद्यालय में…
आरव और अन्वी की मुलाकात…
एक बहस प्रतियोगिता में हुई।
शुरुआत…
तकरार से हुई।
धीरे-धीरे…
दोस्ती…
फिर प्रेम में बदल गई।
दोनों ने…
साथ जीने-मरने के सपने देखे।
लेकिन…
एक दिन…
आरव ने…
बिना कोई कारण बताए…
सबके सामने अन्वी से रिश्ता तोड़ दिया।
उसने कहा—
“मैंने कभी तुमसे प्यार किया ही नहीं।”
अन्वी…
टूट गई।
वह शहर छोड़कर चली गई।
दस साल बाद…
एक पुरानी डायरी…
दोनों की अधूरी कहानी…
फिर से खोल देती है।
