इंदौर शहर…
लगातार हो रही रहस्यमयी गुमशुदगियों से दहशत में था।
पिछले दो महीनों में…
बारह लोग…
बिना कोई सुराग छोड़े गायब हो चुके थे।
हर परिवार…
एक ही बात कहता—
“गायब होने से पहले…
रात में…
किसी ने दरवाज़ा खटखटाया था।”
पुलिस के पास…
न कोई सीसीटीवी फुटेज…
न कोई गवाह…
न कोई सबूत।
मामले की जांच…
एसीपी विराज राणा को सौंपी जाती है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है…
उन्हें एहसास होता है…
कि यह सिर्फ़ गुमशुदगी का मामला नहीं…
बल्कि…
पच्चीस साल पुराने एक ऐसे अपराध से जुड़ा है…
जिसे हमेशा के लिए दफन समझ लिया गया था।
