मध्यप्रदेश के काल्पनिक गाँव देवपुरा में…
पंडित हरिनारायण शास्त्री पिछले चालीस वर्षों से मंदिर की सेवा कर रहे थे।
लोग उन्हें केवल पुजारी नहीं… बल्कि… गाँव का सबसे भरोसेमंद सलाहकार मानते थे।
लेकिन… पिछले कुछ महीनों से… उन्होंने कई लोगों के बारे में… ऐसे सच जान लिए थे… जो पूरे गाँव की तस्वीर बदल सकते थे।
उन्होंने… एक गुप्त डायरी लिखनी शुरू की। जिसमें… हर व्यक्ति के… छिपे अपराध… झूठ… और… धोखे दर्ज थे।
एक दिन… उन्होंने घोषणा की—
“अगली पूर्णिमा को… मैं सबके सामने सच बताऊँगा।”
लेकिन… पूर्णिमा आने से पहले ही… उनकी मौत हो जाती है।
मामले की जांच… एसीपी आरव राणा को सौंपी जाती है।
उनके साथ… फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. ईशा मेहता… और… क्राइम प्रोफाइलर कबीर अवस्थी… उस डायरी… सात संदिग्धों… और… एक ऐसे षड्यंत्र की जांच शुरू करते हैं… जो वर्षों से… पूरे गाँव को… झूठ पर खड़ा किए हुए था।
