काल्पनिक पहाड़ी शहर देवशिला के बाहर स्थित रतनकोट हवेली लगभग एक शताब्दी पुरानी है। हवेली के अंतिम मालिक की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति auction में जाती है। Interior conservation specialist अन्विका राठौड़ को हवेली restore करने का contract मिलता है। अन्विका अपने पति समर्थ वर्धन के साथ कुछ महीनों के लिए हवेली में रहने लगती है। उनकी शादी को सात वर्ष हो चुके हैं। रिश्ता टूटा हुआ नहीं। लेकिन दोनों के बीच वह सहज निकटता भी नहीं बची जो कभी थी। काम। परिवार की अपेक्षाएँ। अधूरी बातचीत। भविष्य को लेकर अलग-अलग इच्छाएँ। दोनों relationship को बचाना चाहते हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट नहीं कि वे वही भविष्य चाहते हैं या केवल सात वर्षों की साझा जिंदगी खोने से डरते हैं। हवेली के मुख्य bedroom में अन्विका को Victorian शैली का एक पुराना four-poster bed मिलता है। पुराने inventory register के अनुसार—बिस्तर 1928 से हवेली में है। लेकिन अजीब बात यह है कि हर कुछ वर्षों बाद उसके मालिक का नाम बदलता गया। और लगभग हर मालिक के जीवन में एक समान घटना दर्ज है—उसने अचानक अपना सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता या जीवन-लक्ष्य छोड़ दिया। किसी ने विवाह तोड़ा। किसी ने परिवार छोड़ा। किसी ने अपना वर्षों पुराना career त्याग दिया। किसी ने उस व्यक्ति को छोड़ दिया जिससे वह बेहद प्रेम करता था। एक पुरानी diary में लिखा मिलता है—“बिस्तर प्रेम नहीं चुराता। वह यह भूलने पर मजबूर करता है कि प्रेम तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण क्यों था।” अन्विका इसे पढ़कर डरती है। लेकिन investigation तब शुरू होती है जब उसे बिस्तर के नीचे बने एक छिपे compartment में दर्जनों पुराने पत्र, photographs और audio recordings मिलते हैं। हर record… किसी पुराने मालिक की निजी जिंदगी से जुड़ा है। और… अन्विका सपनों में वही बातें देख चुकी है… जिन्हें उसने अभी तक पढ़ा ही नहीं था। अब सवाल है—क्या बिस्तर वास्तव में यादें दोहराता है? या… रतनकोट हवेली में कोई ऐसा प्रयोग वर्षों से चलता आया है… जो intimacy और identity की सीमाओं को मिटाता रहा है?
All Chapters
- अध्याय 1 — पहली रात
- अध्याय 2 — किसी और की याद
- अध्याय 3 — वह इच्छा मेरी नहीं थी
- अध्याय 4 — बिस्तर के पुराने मालिक
- अध्याय 5 — समर्थ की रात
- अध्याय 6 — रेवती कहाँ गई?
- अध्याय 7 — अंतरंग यादों का कमरा
- अध्याय 8 — मैं कल क्या चाहती थी?
- अध्याय 9 — खामोशी के पीछे का प्रयोग
- अध्याय 10 — प्रेम या आदत?
- अध्याय 11 — बिस्तर की आख़िरी रात
- अध्याय 12 — खामोश बिस्तर
